परिचय

देश में कांग्रेस के विकल्प के तौर पर ‘रिपब्लिकन पार्टी के गठन का सपना संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देखा था। समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया के साथ इस संदर्भ में उनका पत्राचार भी हुआ था लेकिन दलित, पिछड़े, श्रमिक, अल्पसंख्यक और सर्वहारा वर्ग की राजनीति के लिए सर्वसमावेशी दल और गठबंधन का बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का सपना उनके महापरिनिर्वाण की वजह से अधूरा रह गया। बाद में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के इस मिशन को पूरा करने के लिए बहुजन नायक माननीय डॉ. रामदास आठवले ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) का निर्माण किया।

गणराज्य भारत के संविधान निर्माता एवं दलितों शोषितों के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले परम आदरणीय बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए वर्ष 1956 में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया का गठन किया गया था। पार्टी द्वारा लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशियों को उतारा और बड़ी संख्या में जीत दर्जकर कांग्रेस को झकझोर दिया। उत्तर प्रदेश की विधानसभा आर.पी.आई. के 17 विधायकों और 2 मंत्रियों की उपस्थिति की साक्षी रह चुकी है। साथ ही उत्तर प्रदेश से पार्टी के 4 लोकसभा सदस्य, संसद की शोभा बढ़ा चुके हैं।

15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के पश्चात बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की अध्यक्षता में संविधान सभा गठित हुई, जिसके द्वारा भारत को गणराज्य (रिपब्लिक) बनाने के क्रम में 26 नवम्बर 1949 को संविधान का प्रारूप अंगीकृत किया गया। संविधान के उद्देश्य का (पृष्ठ संख्या 1) पर ही उल्लेख किया गया है कि हम भारत के लोग सामाजिक, आर्थिक, न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, धर्म आदि विभिन्न अवयवों पर दृढ़ संकल्प होकर इस संविधान को अंगीकृत करते हैं। इसी क्रम में 26 जनवरी 1950 को भारत को गणतंत्र घोषित करते हुए पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया। सभी पार्टियों के लिए भारत का संविधान आवश्यक रूप से स्वीकार्य है। इसी शपथ के साथ समस्त जनप्रतिनिधि लोकसभा एवं विभिन्न विधानसभाओं में जनसेवा के भाव से चुनाव जीतने के पश्चात खुद को राष्ट्र एवं राज्य के सेवार्थ अर्पित करते हैं। वर्ष 1950 से 2020 तक हमारा अपना राज स्थापित हुए 70 वर्ष से अधिक समय व्यतीत हो चुका है। इस बीच केंद्र एवं राज्यों ने विभिन्न पार्टियों की सरकारों को चुनाव में विजयी बना कर कार्य करने का अवसर प्रदान किया है। अब एक बार विगत 70 वर्षों के इतिहास पर नजर डालते हैं 32 करोड़ की आबादी वाला प्रदेश भारत अब 135 करोड़ की आबादी छू चुका है। यही बढ़ी हुई आबादी आज हमारी शक्ति की परिचायक है। इस बीच हुए विकास के विषय में, यदि विस्तार से वर्णन किया जाए तो लिखने और पढ़ने वाले दोनों ही काफी आश्चर्यचकित होंगे। कृषि, रक्षा, यांत्रिकी, स्वास्थ्य सहित भूमि से आकाश तक भारतीयों ने अपनी योग्यता को न सिर्फ सिद्ध किया है बल्कि बड़ी-बड़ी वैश्विक ताकतों को इसका लोहा मनमाने पर मजबूर भी किया है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है, जो भयानक एवं दुख से भरा है। आज भी 80 प्रतिशत भारतीय गरीबी रेखा के नीचे हैं और भोजन, शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। संविधान का (पृष्ठ संख्या 1) ही समस्त भारतवासियों के लिए समान अधिकारों एवं कर्तव्य की वचनबद्धता का उल्लेख करता है।

फिर कमी कहां रह गई है? स्पष्ट है कि पूर्व की सरकारें बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के उद्देश्यों को पूरा करने में कहीं ना कहीं असफल रही हैं। उपेक्षित वर्ग के इस समुदाय को उसके अधिकार दिलाने के प्रण के साथ रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के माननीय डॉ. रामदास आठवले जी द्वारा रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नए स्वरूप आर.पी.आई. (आ.) पार्टी को राष्ट्र के समक्ष सेवार्थ खड़ा किया गया है।

18 मार्च, 1956 को आगरा में डॉ. अम्बेडकर का ऐतिहासिक भाषण।

डॉ.बाबासाहेब अम्बेडकर के साप्ताहिक प्रबुद्ध भारत का प्रसिद्ध कवर पेज। यह 1 दिसंबर, 1956 को प्रकाशित हुआ था।

सभा को संबोधित करते राममनोहर लोहिया

हमारा नज़रिया

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) की उत्तर प्रदेश इकाई परम श्रद्धेय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के बताये गए विचारों पर चलकर एक बेहतर उत्तर प्रदेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य गरीबों, दलितों, शोषितों, पिछड़ों, वंचितों, किसानों, मजदूरों, युवाओं, व्यापारियों सहित समाज के प्रत्येक वर्ग की आवाज बनना है, जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हम सबके मार्गदर्शक केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय डॉ. रामदास आठवले जी के मार्गदर्शन में हम उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ खड़े हैं। साथ ही हर वर्ग के सामाजिक, आर्थिक, न्यायिक अधिकारों की बात कर रहे हैं।

राजनैतिक रूप से बड़ा महत्वपूर्ण प्रदेश होने के बावजूद एक पिछड़े प्रदेश के रूप में इसकी गिनती होती है। ऐसे में ये बिल्कुल साफ है कि प्रदेश के विकास के लिये कभी वह राजनैतिक इच्छाशक्ति प्रदेश के लोगों को नहीं मिल पाई, जिसकी इसे जरूरत है। ऐसे में आर.पी.आई. (आठवले) उत्तर प्रदेश में हर वर्ग के अधिकारों की लड़ाई लड़ेगी एवं उत्तर प्रदेश के उत्थान के लिए प्रयासरत रहेगी।

हमारा संकल्प

हमारे मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जीवनपर्यंत शांति, समानता एवं सामाजिक न्याय की बात की। आर.पी.आई.(आठवले) बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करते हुए उसी दिशा में लगातार काम कर रही है। राजनीतिक,आर्थिक, सामाजिक रूप से उत्तर प्रदेश, देश का महत्वपूर्ण राज्य है। यहां लोकसभा की 80 सीटें एवं विधानसभा की 403 सीटें हैं।  यहां बड़ी संख्या में सामाजिक, आर्थिक रूप से दलित, पिछड़ा, शोषित, वंचित, अल्पसंख्यक समाज निवास करता है। राजनीतिक रूप से इतना महत्वपूर्ण राज्य  होने के बावजूद भी अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति अच्छी नहीं है। जातिवाद, सम्प्रदायवाद, असमानता जैसी सामाजिक विषमताओं के नाम पर राजनीतिक दलों ने यहां की जनता का केवल और केवल शोषण ही किया है। आर.पी.आई.(आठवले) उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री पवन भाई गुप्ता के नेतृत्व में आरपीआई ने उत्तर प्रदेश में सामाजिक, आर्थिक एवं न्यायिक लड़ाई का उद्घोष किया है। हमारा उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जिसकी भारत के संविधान में अटूट श्रद्धा हो और जो हर व्यक्ति के अधिकारों की बात करता हो।