जातीय जनगणना

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले), उत्तर प्रदेश जातिगत जनगणना का पूर्ण रूप से समर्थन करती है। उत्तर प्रदेश में जातिगत जनगणना कराने के लिए प्रयासरत है। आरपीआई का विश्वास है कि जातिगत जनगणना असमानता दूर करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, क्योंकि इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को चिन्हित किया जा सकेगा एवं उनके संवर्धन के लिए सही दिशा में काम हो सकेगा।

भारत का संविधान भी जातिगत जनगणना आयोजित कराने का पक्षधर है। अनुच्छेद 340  सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की दशा की जाँच करने और इस संबंध में सरकारों द्वारा उठाए जा सकने वाले कदमों के बारे में सिफ़ारिशें करने के लिये एक आयोग की नियुक्ति का प्रावधान करता है।

सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए

भारत के कई हिस्सों में जाति-आधारित भेदभाव अभी भी प्रचलित है। जातिगत जनगणना वंचित समूहों की पहचान करने और उन्हें नीति निर्माण की मुख्यधारा में लाने में मदद कर सकती है।
विभिन्न जाति समूहों के वितरण को समझकर, सामाजिक असमानता को दूर करने और हाशिये पर अवस्थित समुदायों के उत्थान के लिये लक्षित नीतियों को लागू किया जा सकता है।

संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिये

OBC और अन्य समूहों की जनसंख्या पर सटीक आँकड़े के बिना संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करना कठिन है।
जातिगत जनगणना विभिन्न जाति समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों और आवश्यकताओं के बारे में सूचना प्रदान कर इस संबंध में मदद कर सकती है।
यह नीति निर्माताओं को ऐसी नीतियों के निर्माण में मार्गदर्शन प्रदान कर सकती है जो प्रत्येक समूह की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करे और इस प्रकार समावेशी विकास को बढ़ावा दे।

सकारात्मक कार्रवाई नीतियों की प्रभावशीलता की निगरानी के लिये

OBC और अन्य समूहों के लिये आरक्षण जैसी सकारात्मक कार्रवाई नीतियों का उद्देश्य सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है। हालाँकि, जनसंख्या पर उचित आँकड़े के बिना इन नीतियों के प्रभाव और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जातिगत जनगणना ऐसी नीतियों के कार्यान्वयन और परिणामों की निगरानी में मदद कर सकती है, जिससे नीति निर्माताओं को उनकी निरंतरता और संशोधन के संबंध में सूचना-संपन्न निर्णय लेने में सक्षम बनाया जा सकता है।

भारतीय समाज की एक व्यापक तस्वीर प्रदान करने के लिए

जाति भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग है, जो सामाजिक संबंधों, आर्थिक अवसरों और राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित करती है।

जातिगत जनगणना भारतीय समाज की विविधता की एक व्यापक तस्वीर प्रदान कर सकती है, जो सामाजिक ताने-बाने और विभिन्न जाति समूहों के बीच परस्पर क्रिया पर प्रकाश डाल सकती है।

यह आँकड़ा सामाजिक गतिशीलता की बेहतर समझ पाने में योगदान कर सकता है।