महिला सशक्तिकरण

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर सार्वजनिक जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में दृढ़ विश्वास रखते थे। 1942 में नागपुर में अखिल भारतीय वंचित वर्ग महिला सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की प्रगति को, उस समाज की महिलाओं की प्रगति से मापा जा सकता है।

आजादी के बाद हिंदू कोड बिल की मांग को महिलाएं कैसे भुला सकती हैं जिसके लागू न होने के कारण भी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। डॉ. भीमराव अंबेडकर का कहना था कि सामाजिक न्याय के लिए महिला सशक्तिकरण का होना जरूरी है तभी समाज में महिला का उत्थान हो सकता है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का उद्देश्य स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के लोकतांत्रिक विचारों के साथ समाज का पुनः निर्माण करना था जिसमें महिलाओं को आगे लाया जाए।

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (आठवले) बाबा साहेब के महिला सशक्तिकरण की सोच को आगे बढ़ा रही है और महिलाओं के आर्थिक,सामाजिक, राजनीतिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए संविधान में विभिन्न अनुच्छेदों के माध्यम से महिला कल्याण के दिशा में विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों का निर्माण किया।

महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक संवैधानिक उपाय

  • अनुच्छेद 14 – यह विधि के समक्ष समता और विधियों के समान संरक्षण की गारंटी देता है, लिंग के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है।
  • अनुच्छेद 15(3) – राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिये विशेष उपबंध करने की अनुमति देता है।
  • अनुच्छेद 16 – लोक नियोजन के विषय में समान अवसर प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 39(d) – पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिये समान कार्य के लिये समान वेतन का आह्वान करता है।
  • अनुच्छेद 42 – राज्य को कार्य की उचित एवं मानवीय दशाएँ सुनिश्चित करने और मातृत्व राहत प्रदान करने के लिये उपबंध करने का निर्देश देता है।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (आठवले) बाबा साहेब के महिला सशक्तिकरण की सोच को आगे बढ़ा रही है और महिलाओं के आर्थिक,सामाजिक, राजनीतिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है